संघ मेहरबान तो चढ़ावा चोर से वोट चोर तक सबको अभयदान
सब कुछ सबके सामने होने, सारे तथ्य और प्रमाण उजागर होने के बाद भी बेशर्म दीदादिलेरी के साथ इतनी हेकड़ी करने की हिम्मत कहाँ से आती है? कानूनों अदालतों की परवाह न करने का इत्ता पक्का भरोसा कहाँ से आता है? यह उस सर्वसत्तावाद से आता है, जो पिछले एक दशक से अपनी जकड़न का दायरा बढ़ाते-बढ़ाते आज यहाँ तक पहुँच गया है। शंकराचार्य की कथा के हिसाब से अब संघ – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – ही सत्य है, बाकी सब मिथ्या है। जो उनके साथ है, उनके लिए वही ब्रह्म है – बाकी सब भरम है। सारे दुष्टों, भ्रष्टों, बलात्कारियों, व्यभिचारियों, हत्यारों, लुटेरों को अपने में समाहित करके यह काम राजनीति में पहले ही किया जा चुका था। आसारामों, गुरमीत राम रहीमों जैसों के जरिये धर्म के क्षेत्र में भी इसे पहुंचाया जा चुका था। मंदिरों में सेंध लगवाना तो इसका मामूली सहउत्पाद – बाय प्रोडक्ट – है ।
R.D Shende
मुख्य संपादक
